कटिहार शहर के पांच बड़े टूरिस्ट स्पॉट

कटिहार: अगर आप बिहार घुमने का प्लान बना रहे हैं तब आप बिहार के कटिहार ज़िला जरूर आएं। कटिहार में आप आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व को समझ सकते हैं। कटिहार घुमने के लिए एक खुबसूरत जगह है जहां पर आप घुमने के लिए कई स्थानों पर जा सकते हैं। वैसे तो कटिहार को एक समय काला पानी के नाम भी जाना जाता लेकिन वक्त के साथ कटिहार में बदलाव भी आया कटिहार में ऐसे कई पर्यटन स्थल जहां पर आप घुमने जा सकते हैं।

 

 

 

कटिहार शहर के पांच बड़े टूरिस्ट स्पॉट

त्रिमोहिनी संगम

 

त्रिमोहिनी संगम जो कि प्रयागराज बिहार राज्य के कटिहार जिला के कुर्सेला प्रखंड के कटरिया गाँव के निकट स्तिथ नदियों का संगम है। यहाँ प्रमुख रूप से कोशी का गंगा में मिलन होता है, जिसके साथ ही कलबलिया नदी की एक छोटी धारा की उत्पत्ति होती है । त्रिमोहिनी संगम भारत की सबसे बड़ी उत्तरवाहिनी गंगा का संगम है। 12 फरवरी वर्ष 1948 में महात्मा गांधी के अस्थि कलश जिन 12 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है। ये भी कटिहार का  प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं जहां पर घुमने के लिए जा सकते हैं अगर आप कभी आएं हैं तो त्रिमोहिनी संगम ना जाएं तो शायद अपने कभी कटिहार घुमा ही नहीं है। वैसे त्रिमोहिनी संगम जुड़े एक और मान्यता है कि काशी का निर्माण यहीं होने वाला था सवा हाथ ज़मीन कम पड़ गई जिस कारण से यहां पर काशी का निर्माण नहीं हो पाए।

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त्रिमोहिनी संगम जुड़े कुछ खास बात?

 

  • बाबा बटेश्वरनाथ मंदिर – संगम के समीप ही बाबा 
  • बटेश्वरनाथ का प्रसिद्ध पौराणिक मंदिर है।
  • माघी पूर्णिमा मेला- माघ माह की पूर्णिमा को लगने वाला मेला जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों सहित नेपाल से भी लोग आते हैं।

 

  1. मनिहारी 

मनिहारी कटिहार ज़िले के पर्यटन केंद्र तौर पर जाना जाता हैं और एक नगर है। यह गंगा नदी के तट पर है जो कि व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र है। मनिहारी का इतिहास काफी प्राचीनकाल से जुड़ा है। मनिहारी का उल्लेख महाभारत और रामायण में मिलता है। महाभारत में, यह कहा गया है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान मनिहारी में कुछ समय बिताया था। रामायण में, यह बताया गया है कि भगवान राम और लक्ष्मण ने लंका जाने से पहले मनिहारी में एक रात्रि विश्राम किया था। मध्य युग में भी मनिहारी एक महत्वपूर्ण व्यापार के केंद्र बनकर उभरा है।  इसके अलावा अंग्रेजों काल में भी मनिहारी का विकास का रफ्तार नहीं रूका। मनिहारी भी महत्वपूर्ण पर्यटन का केन्द्र यहां पर गंगा नदी और गोगाबिल झील है। 

 

 गोगाबिल झील

 

 गोगाबिल झील जो कि कटिहार ज़िले के मनिहारी नगर पंचायत में है। ये झील भी कटिहार के पर्यटन के मुख्य केंद्र तौर पर जाना जाता है। यह झील लगभग 5 km 217 एकड़ में फैली हुई है। गंगा और महानदी से सीधे जुड़े होने के कारण, झील इन नदियों को बरसात के मौसम में सहायक नदियों के माध्यम से जोड़ती है। कई प्रकार के स्थलीय, जलीय जंतु और पक्षी इस स्थान पर आते हैं। कहते हैं कि जनवरी-फरवरी के बीच ही इस झील के पास विदेशों से पक्षी भी आते हैं। समृद्ध वनस्पतियों और जीवों के साथ, इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में देखा जा सकता है।

 

  1. बागी मठ : कटिहार के बाग़ी गांव में बागी मठ के पर्यटकों का पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट है। जो भी दुनिया के शोर शराबो दुर रहना चाहते हैं तो आप इस बागी मठ में जा सकतें हैं।गहन भक्ति, आध्यात्मिकता और विश्वास को महसूस कर सकते हैं।

 

  1. रामकृष्ण मिशन आश्रम

1925 में जब रामकृष्ण मिशन आश्रम की स्थापना किया तब इसका उद्देश्य था कि प्लेग और मलेरिया के रोगियों को राहत प्रदान करने के लिए था। उसके बाद यह धीरे-धीरे खुद को एक छोटे से मंदिर में स्थापित कर लिया। मंदिर बनने के बाद यह केंद्र रामकृष्ण मिशन के सबसे सक्रिय केंद्रों में से एक बन गया है। शिव की पूजा के रूप में जीव की सेवा की भावना में काम करते हुए  यह आधुनिक मुहावरे में प्राचीन वेदों के सिद्धांतों को व्यक्त करता है। यहां पर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। आप भी यहां पर पूजा करने के लिए जा सकते हैं। 

 

  1. हनुमान मंदिर मिर्चाबाड़ी

मिर्चाबाड़ी चौक पर स्थित हनुमान मंदिर जो कि कटिहार ज़िले में काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर में आप दर्शन करने के लिए जा सकते हैं। ये हनुमान मंदिर पुरे कटिहार शहर में आस्था का मुख्य केंद्र है। हाल में मंदिर का पुर्ण निर्माण हुआ जिसके बाद ये मंदिर और भी भव्य बन चुका है।

 

  1. काली मंदिर

काली मंदिर जो कि ऐतिहासिक महत्व है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, यहां भगवान की मूर्ति को बहुत खूबसूरती से सजाया जाता है। इस मंदिर की खूबसूरती ही पर्यटकों को आकर्षित करती है। यहां की दीवारों पर आकर्षक कलाकृतियां और वास्तुकला ही इसके पुरातात्विक महत्व को बखूबी दर्शाती हैं। दुर्गाष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों के समय, इस मंदिर में पूजा समारोह के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और पूजा करते हैं। इस मंदिर में कटिहार के लोगों का अस्था का मुख्य केंद्र है। 

 

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